Mother Teresa Biography In Hindi | मदर टेरेसा की जीवनी

मदर टेरेसा ने अपना सारा जीवन लोगों की भलाई के लिए निकाल दिया वह एक धार्मिक महिला थी जिन्होंने लोगों की भलाई करना ही अपना मुख्य कर्तव्य समझा |जीवन भर उसी भलाई के लिए जीते रही | आज इस भाग में आप मदर टेरेसा के विषय मे संपूर्ण जानकारी को प्राप्त करेंगे | इसमें शामिल है मदर टेरेसा का प्रारंभिक जीवन , उनकी शिक्षा , नन बनने का सफर, भारत आना , गरीबों की मदद करना , उपलब्धियां , सम्मान , कुछ अनमोल विचार, उनसे जुड़े कुछ प्रस्न इत्यादि |

मदर टेरेसा का प्रारंभिक जीवन काल

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 ईस्वी को स्कॉप्जे (मेसीडोनिया) में हुआ था उनके पिता का नहान निकोला बोयाजू था जो कि एक पेसे से व्यवसायिक व्यक्ति थे | मदर टेरेसा का असली नाम अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ था | इस नाम का मतलब भी है अल्बेनियन भाषा में गोंझा का मतलब फूल होता है |

मदर टेरेसा का प्रारंभिक जीवन खुशहाल नहीं था | मदर टेरेसा जब 8 साल की थी तब इनके पिता का देहांत हो गया। मदर टेरेसा के लालन पोषण की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ | मदर टेरेसा के माता का नाम द्राना बोयाजू था | अब इस परिवार का गुजर -बसर बड़ी मुश्किल से हो पाता था |

मदर टेरेसा 5 भाई बहन थे | इनकी बड़ी बहन की उम्र 7 वर्ष तथा छोटे भाई की उम्र 2 साल थी | बाकी दो बच्चे बचपन में ही गुजर गए थे | उनकी मां छोटे-मोटे काम करके अपने घर का गुजारा करती | मदर टेरेसा बहुत होशियार और समझदार लड़की थी | उन्हें पढ़ाई के साथ गाना गाना ही बहुत अच्छा लगता था और वह चर्च में जाकर कभी – कभी गाना गाया करते थे |

मदर टेरेसा बड़ी बहन गायककार थी | वह चर्च में गाना गाया करते थे | इसी से मदर टेरेसा को भी प्रेरणा मिली और उसने भी गाना बजाना खिखा | मदर टेरेसा लोगों तथा लोगों के प्रति बहुत ही दयालु व्यवहार रखती थी | वह एक नरम दिल की महिला थी | अतः उन्हे बचपन में ही कुछ ऐसा ज्ञान प्राप्त हो गया कि मदर टेरेसा ने ठान लिया कि वाह लोगों की भलाई में अपना सारा जीवन व्यतीत कर देगी |

18 साल कि उम्र मे ही मदर टेरेसा अपने जीवन का फैसला कर लिया और उन्होने सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो’शामिल होने का फैसला कर लिया | सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो’ एक ऐसी संस्था थी जोकि ईश्वर के कार्यों पर कार्य करते थे उनके दिए हुए वचनों पर कार्य करते है और लोगों की भलाई करने का काम इसी संस्था द्वारा किया जाता है यह संस्था अम्रीका कि एक प्रसिद्ध संस्था है |

मदर टेरेसा कि शिक्षा व नन बनने का सफर

मदर टेरेसा ने 18 साल की उम्र में ही नन बनने के सफर कि शुरुआत कर दी थी | हालांकि वह चर्च और धर्मार्थ के कार्यों को बचपन से ही करते आ रही है लेकिन उसने 18 साल की उम्र में नन बनने का फैसला कर लिया |

मदर टेरेसा की प्रारंभिक शिक्षा कॉन्वेंट द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालय तथा उसके बाद फिर राज्य द्वारा संचालित माध्यमिक विध्यालय मे हुई | मदर टेरेसा ज्यादा पढ़ी लिखी नही थी | उन्होंने डिग्री लेना उचित नहीं समझा हालाकि वह आयरलैंड अंग्रेजी सीखने गयी थी | वहां से अच्छी अङ्ग्रेज़ी खिखकर उन्होने बच्चों को शिखना सुरू कर दिया |

उन्होंने 18 साल में ही ईश्वर तथा लोगों के सहायता के लिए अपना सारा जीवन नन बनकर बिताया | साल 1928 मे मदर टेरेसा आयरलैंड के डबलिन में लोरेटो की बहनों में शामिल होने गयी तो कमिटी द्वारा इनका नाम मदर टेरेसा प्रतिपादित कर दिया गया |

मदर टेरेसा , अलग-अलग जगहों पर जा जाकर लोगों की मदद और सहायता करती | यह कार्य लोरेटों संस्था के द्वारा किया जा रहा था जिसमे मदर टेरेसा भी शामिल थी | मदर टेरेसा विभिन्न जगहों पर जाती और बच्चों को पढ़ाती उनको शिक्षा देती | खासकर वह गरीब बच्चों को पढ़ाती जिनके पास निर्धनता बहुत है |

मदर टेरेसा का भारत आना तथा गरीबों की मदद करना

मदर टेरेसा 6 जनवरी 1929 को कोलकाता में आई और वहां पर उन्होंने एक अध्यापिका के रूप में कार्य प्रणाली को शुरू कर किया | कुछ ही समय बाद वह बच्चों की बहुत फेवरेट अध्यापिका बन गई और बच्चे ने उन्हें बहुत पसंद करने लगे |

मदर टेरेसा कुछ सालों बाद भारत आए वहां से वह दार्जिलिंग गई | दार्जिलिंग में कुछ साल कार्यरत रही | उसके पश्चात कोलकाता आ गई मई 1931 में उन्हें सेंट मैरी हाई स्कूल फॉर गर्ल्स में पढ़ाने का मौका मिला और उन्होंने इस कार्य को बखूबी निभाया |

वहां पर उन्होंने शहर के सबसे गरीब और अशिक्षित परिवार की लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया | उनको विभिन्न प्रकार की जानकारी दी | मदर टेरेसा अपने आसपास के वातावरण की करीबी को बहुत अच्छे से महसूस कर रही थी | वह भुखमरी और गरीबी से लड़ रहे लोगों के लिए कुछ करना चाहते थे |

उसी साल बंगाल में बहुत सूखा पड़ा , भुखमरी से हालत हो गई अतः मदर टेरेसा ने सबकी मदद करने का फैसला किया | 24 मई 1937 ईस्वी को उन्होंने ठान लिया कि इस गरीबी और भूखमरी के खिलाफ लड़ाई लड़ना ही होगा और वह उन्होने इसके प्रति लड़ाई लड़ना शुरू कर दिया |

वर्ष 1944 मे मदर टेरेसा हेडमिस्ट्रेस बन गई अब अधिक कार्य भार सभालने लगी | और उनके ऊपर काफी जिम्मेदारी बढ़ गई थी तभी मदर टेरेसा ने एक संस्था बनाने का फैसला किया |

1946 में भारत में हिंदू मुस्लिम के दंगे भड़क गए और जगह जगह पर कत्लेआम शुरू हो गया | यह सब देख कर मदर टेरेसा को बहुत आहात लगा और वह लोगों की भरकम मदद करने के लिए तैयार हो गई |

मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी एक संस्था

मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी (1946 ) मदर टेरेसा द्वारा संचालित , यह गरीबों की मदद करने वाली संस्था बन गई | इस संस्था ने अलग-अलग देशों में लोगों की मदद कि | कई जगहों से चंदा इकट्ठा किया जिससे धर्मार्थ के कार्य को आगे बढ़े जा सके | मदर टेरेसा ने इस चैरिटी को चलाने के लिए अपना पूरा सारा जीवन लगा दिया |

मदर टेरेसा ने धर्मार्थ के कार्य के कारणवश होली फैमिली हॉस्पिटल से नर्सिंग की ट्रेनिंग को पूरा किया | 1948 में वापस आए अब उन्होने बुजुर्गों , घायलों , बीमारों , लाचारों की मदद करना शुरू कर दिया | अपने हाथों से उनके गांवों पर मरहम लगाती और उन्हें सांत्वना देती ऐसी थी अपनी मदर टेरेसा |

मदर टेरेसा ने लोरेटो संस्था को भी छोड़ दिया और इस मुश्किल पड़ाव में बिल्कुल अकेले हो चुकी थी | अकेले ही कार्यभार संभालने लगी हालांकि मदर टेरेसा इस समय बहुत ही दुखी थी और वह लोरेटो सिस्टर की संस्था मे भी नहीं जाना चाहती थी | मदर टेरेसा बहुत पैसे वाली नहीं थी वह अब अपना गुजर-बसर बहुत ही मुश्किलों से कर पा रही थी लेकिन उन्होने हार नहीं मानी और वह अपने कार्य कार्यरत रही |

7 अक्टूबर 1950 मदर टेरेसा के लिए जीवन का एक बहुत बड़ा साल था क्योंकि इसी साल में मदर टेरेसा की चैरिटी को अमेरिका के वेटिकन सिटी से मंजूरी मिल गई | इस चैरिटी में दुखीहारो , लाचारों , बीमारों , गरीबों , असहयोग सभी का पूर्ण रूप से देखभाल करना शामिल था |

मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी’ की स्थापना करते समय इसमें कुल 13 लोग शामिल थे | लेकिन जब मदर टेरेसा की मृत्यु हुई 1997 में तब इसमें लगभग 4000 से भी ज्यादा लोग शामिल थे | यह चैरिटी इतनी लोकप्रिय और प्रसिद्ध हुई कि मदर टेरेसा को अलग-अलग जगहों से दान इलना शुरू हो गया | लोग जानने लगे खासकर बड़ी पहुंच में रहने वाले लोग जैसे भारत के प्रधानमंत्री और भी कई देशों के प्रधानमंत्री | प्रधानमंत्री की अलग संस्थाओं ने मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी’ मदद करना प्रारंभ कर दिया | अलग-अलग जगह से दान मिलने लगा और मदर टेरेसा के राहत कोष में रकम बढ़ने लगी |

अब मदर टेरेसा के राहत कोष में बहुत भारी रकम जमा होने लगी इन सभी पैसों का मदर टेरेसा सही उपयोग करती | वह गरीबों और लाचारों को उनकी जरूरत के अनुसार उन्हे चीजों का मुहैया करवाती | ऐसे ही करते करते मदर टेरेसा ने लगभग एक 125 अलग-अलग देशों में छोटी – छूती चैरिटी खोल दी जिसमें अलग-अलग देशों के गरीब और असहाय लोगों की मदद करना शामिल था |

मदर टेरेसा इन कार्यो से भारत अन्य देशों में बहुत ही प्रसिद्ध हो गयी | लोग मदर टेरेसा को मदर कहते हुए पुकारने लगे अतः वहीं से मदर टेरेसा का नाम मदर टेरेसा पड़ा क्योंकि वह सब की माता के रूप में उभर कर सामने आई |

मदर टेरेसा इतनी निर्मम ह्रदय की थी | वह अपने आसपास दुख गरीबी को नहीं देख सकती थी वह अपनी इस चैरिटी के जरिए सभी प्रकार के लोगों वह चाहे शराबी ,एड्स रोगी ,कुष्ठ रोगी ,दंगों में घायल रोगी , नवजात शिशु , बूढ़ी औरत, भिखारी व्यक्ति वह सभी जिन्हें मदद की आवश्यकता है मदर टेरेसा ने उसकी मदद की |

मदर टेरेसा पर विवाद , आरोप और आलोचनाएं

मदर टेरेसा ने देश समाज के लिए बहुत ऐसे काम करें जो उन्हें आज भी लोग याद करते हैं | जब मदर टेरेसा बहुत ही प्रसिद्ध हो गई तो उनके नाम पर कई आलोचनाएं तथा उन पर कई आरोप भी लगने लगे | जो कि इस प्रकार हैं

कनाडाई शिक्षाविदों सर्ज लारिवी, जेनेविएव चेनार्ड और कैरोल सेनेचल के एक पेपर के अनुसार ,—–

मदर टेरेसा ने अपनी चैरिटी के जरिए लाखों नहीं वरन ने करोड़ों रुपए पाये | लेकिन चिकित्सा के मामले में देखभाल और पीड़ितों के लिए दर्द निवारक दवाओं की कमी रहती थी |

इन शिक्षाविदों की राय , में मदर टेरेसा का मानना था कि बीमारों को क्रूस पर टंगे मसीह की तरीके दर्द की पीड़ा होना चाहिए | वह सभी मरीजों को क्रूस पर हिल गए ईसा मसीह का दर्द भोगना देना चाहती थी अत: यही एक कारण हो सकता है जो उसके पास दर्द निवारक टैबलेट की कमी रहती थी |

“मदर टेरेसा के एक मुख्य आलोचक अंग्रेजी पत्रकार एंटीथिस्ट क्रिस्टोफर हिचेन्स अपनी पत्रिका में 2003 में एक लेख जारी किया वह लेख इस प्रकार है ——-


“यह हमें चर्च के मध्यकालीन भ्रष्टाचार की ओर लौटाता है, जिसने गरीबों को नरक और संयम का प्रचार करते हुए अमीरों को अनुग्रह बेचा। [मदर टेरेसा] गरीबों की मित्र नहीं थी। वह गरीबी की मित्र थी । उसने कहा कि पीड़ा ईश्वर की ओर से एक उपहार था। उसने अपना जीवन गरीबी के एकमात्र ज्ञात इलाज के विरोध में बिताया, जो कि महिलाओं का सशक्तिकरण और अनिवार्य प्रजनन के पशुधन संस्करण से उनकी मुक्ति है।”

मदर टेरेसा की उपलब्धियां तथा सम्मान

मदर टेरेसा को मानव जाति के सेवा के लिए कई पुरस्कार दिए गए यह पुरस्कार राष्ट्रीयता अंतर्राष्ट्रीय श्रेणी के थे | 1962 ईस्वी में मदर टेरेसा को भारत का सर्वोत्तम पुरस्कार पद्मश्री से नवाजा गया | इन्होंने भारत तथा देश दुनिया के लिए इतने अच्छे काम किए कि भारत सरकार ने बाद में इनको 1980 में भारत रत्न द्वारा सम्मानित किया | संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा उनके परिमार्थ के कार्य को देखते हुए 1950 ईस्वी में मेडल ऑफ फ्रीडम से नवाजा गया |

कल्याण तथा समाज के शुद्धिकरण के लिए मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया | नोबेल पुरस्कार के साथ एक बड़ी धनराशि भी दी जाती है मदर टेरेसा ने इस धनराशि को जो की थी 192,000 डॉलर को गरीबों, असहाय , लचारों के लिए दान में देने की घोषणा कर दी |

मदर टेरेसा के अनमोल विचार तथा वक्तव्य

मदर टेरेसा के कुछ महत्वपूर्ण और अनमोल विचा जो दिल को छू लेंगे

  • यदि आप सौ व्यक्तियों की सहायता नहीं कर सकते तो केवल एक की ही सहायता कर दें।
  • भगवान यह अपेक्षा नहीं करते कि हम सफल हों, वे तो केवल इतना चाहते हैं कि हम प्रयास करें।
  • मीठे बोल बोलने में संक्षिप्त व आसान हो सकते हैं लेकिन उनकी गूंज सचमुच अनंत होती है।
  • कल तो चला गया, आने वाला कल अभी आया नहीं, हमारे पास केवल आज है। आइए, शुरुआत करें।
  • मैं सफलता के लिए प्रार्थना नहीं करती, मैं विश्वास के लिए प्रार्थना करती हूं।
  • हम कभी नहीं जान पाएंगे कि एक छोटी-सी मुस्कान कितना भला कर सकती है और कितनों को खुशी दे सकती है।
  • छोटी-छोटी बातों में विश्वास रखें क्योंकि इनमें ही आपकी शक्ति निहित है। यही आपको आगे ले जाती है।
  • वह व्यक्ति अच्छा कार्य निष्पादन करता है जो परिस्थितियों का ठीक से सामना करता है।
  • कोई गलती न करना मनुष्य के बूते की बात नहीं है लेकिन अपनी त्रुटियाें और गलतियों से समझदार व्यक्ति भविष्य के लिए बुद्धिमत्ता अवश्य सीख लेते हैं।
  • किसी के द्वारा नही चाहने की भावना और अकेलापन होना यह भयंकर गरीबी के समान है।
    छोटी से छोटी चीज में भी ईमानदार रहिये क्योंकि इसी में आपकी शक्ति निर्भर करती है
  • मै चाहती हूँ की आप अपने पड़ोसी के बारे में चिंतित रहें. क्या आप अपने पड़ोसी को जानते हो?
  • यदि हमारे बीच कोई शांति नहीं है, तो वह इसलिए क्योंकि हम भूल गए हैं कि हम एक दूसरे से संबंधित है.
  • यदि आप एक सौ लोगों को भोजन नहीं करा सकते हैं, तो सिर्फ एक को ही भोजन करवाएं.
  • यदि आप चाहते हैं की एक प्रेम संदेश सुना जाय तो पहले उसे भेजें. जैसे एक चिराग को जलाए रखने के लिए हमें दिए में तेल डालते रहना पड़ता है
  • अकेलापन सबसे भयानक गरीबी है.
  • प्यार करीबी लोगों की देखभाल लेने के द्वारा शुरू होता है – जो आपके घर पर हैं|
    अकेलापन और अवांछित रहने की भावना सबसे भयानक गरीबी है.
  • प्यार हर मौसम में होने वाला फल है, और हर व्यक्ति के पहुंच के अन्दर है.
  • कई लोगों हमारे कार्य को व्यवसाय मानते हैं लेकिन हमारा व्यवसाय यीशु का प्रेम है.
  • शांति एक मुस्कान के साथ शुरू होता है.
  • आज के समाज की सबसे बड़ी बीमारी कुष्ठ रोग या तपेदिक नहीं है, बल्कि अवांछित रहने की भावना है.
  • प्यार के लिए भूख को मिटाना रोटी के लिए भूख की मिटने से कहीं ज्यादा मुश्किल है.
  • चमत्कार यह नहीं है कि हम यह काम करते हैं, बल्कि यह है की ऐसा करने में हमें ख़ुशी मिलती है.-मदर टेरेसा
  • छोटी चीजों में वफादार रहिये क्योंकि इन्ही में आपकी शक्ति निहित है।
  • अनुशासन लक्ष्यों और उपलब्धि के बीच पुल है।
  • दया और प्रेम भरे शब्द छोटे हो सकते हैं लेकिन वास्तव में उनकी गूँज की कोई सीमा नही
  • अगर हमारे मन को शांति नहीं है तो इसकी कारण है कि हम यह भूल गये है कि हम एक दुसरे के हैं।
  • हम यही सोचते है की हमारे किये हुए कार्य तो सागर में एक बूंद बराबर है, पर उस बूंद के बिना सागर का पानी कम ही होगा।
  • प्रेम कभी कोई नापतोल नहीं करता, वो बस देता है।
  • अगर आपको प्यार के कुछ शब्द सुनने है, तो पहले आपको कुछ प्यार के शब्द कहने भी पड़ेंगे. बिलकुल उसी तरह जैसे किसी दिए को जलाये रखने के लिए पहले उसमे तेल भी डालना पड़ता है।
  • उनमे से हर कोई किसी न किसी भेस में भगवान है.
  • सादगी से जिए ताकि दूसरे भी जी सकें।-मदर टेरेसा
  • यीशु ने कहा है की एक दूसरे से प्रेम करो। उन्होंने यह नहीं कहा की समस्त संसार से प्रेम करो।
  • यदि हमारे मन में शांति नहीं है तो इसकी वजह है कि हम यह भूल चुके हैं कि हम एक दुसरे के हैं।
  • जो आपने कई वर्षों में बनाया है वह रात भर में नष्ट हो सकता है तो भी क्या आगे बढिए उसे बनाते रहिये।
  • लोग अवास्तविक, विसंगत और आत्मा केन्द्रित होते हैं फिर भी उन्हें प्यार दीजिये।
  • सबसे बड़ी बीमारी कुष्ठ रोग या तपेदिक नहीं है , बल्कि अवांछित होना ही सबसे बड़ी बीमारी है।
  • जिस व्यक्ति को कोई चाहने वाला न हो, कोई ख्याल रखने वाला न हो, जिसे हर कोई भूल चुका हो,मेरे विचार से वह किसी ऐसे व्यक्ति की तुलना में जिसके पास कुछ खाने को न हो,कहीं बड़ी भूख, कही बड़ी गरीबी से ग्रस्त है।
  • अगर आप यह देखेंगे की लोग कैसे हैं तो आप के पास उन्हें प्रेम करने का समय नहीं मिलेगा।
  • शांति की शुरुआत मुस्कराहट से होती है।
  • जहाँ जाइये प्यार फैलाइए। जो भी आपके पास आये वह और खुश होकर लौटे।
  • पेड़, फूल और पौधे शांति में विकसित होते हैं, सितारे, सूर्य और चंद्रमा शांति से गतिमान रहते हैं, शांति हमें नयी संभावनाएं देती है |
  • सबसे बड़ा रोग किसी के लिए भी कुछ न होना है।
  • बिना प्रेम के कार्य करना दासता है।
  • एक जीवन जो दूसरों के लिए नहीं जीया गया वह जीवन नहीं है।
  • प्रत्येक वस्तु जो नहीं दी गयी है खो चुकी हु ।
  • हम सभी महान कार्य नहीं कर सकते लेकिन हम अन्य कार्यों को प्रेम से कर सकते हैं।
  • मैं एक छोटी पेंसिल के समान हूँ जो ईश्वर के हाथ में है जो इस संसार को प्रेम का सन्देश भेज रहे हैं।
  • हम सभी ईश्वर के हाथ में एक कलम के सामान है।
  • यह महत्वपूर्ण नहीं है आपने कितना दिया, बल्कि यह है की देते समय आपने कितने प्रेम से दिया।
  • प्रेम हर ऋतू में मिलने वाले फल की तरह है जो प्रत्येक की पहुँच में है।
  • वे शब्द जो ईश्वर का प्रकाश नहीं देते अँधेरा फैलाते हैं।
  • कार्य में प्रार्थना प्यार है, कार्य में प्यार सेवा है।
  • खूबसूरत लोग हमेशा अच्छे नहीं होते। लेकिन अच्छे लोग हमेशा खूबसूरत होते है।
  • आप दुनिया में प्रेम फ़ैलाने के लिए क्या कर सकते हैं ? घर जाइये और अपने परिवार से प्रेम करिए

मदर टेरेसा की मृत्यु

मदर टेरेसा ने अपना सारा जीवन लोगों के कल्याण और भलाई के लिए लगा दिया | मदर टेरेसा की उम्र अब बहुत बढ़ती जा रही थी और बढ़ती उम्र के साथ उन्हें कई बीमारियों ने घेर लिया | सन 1983 में 73 वर्ष की आयु में ने पहली बार दिल का दौरा पड़ा उस समय वह रूम के पोप जॉन पॉल द्वितीय से मिलने के लिए गयी थी | उसके बाद 1989 मे फिर से दिल का दौरा पड़ा इस बार उन्हें एक प्रतीक पेसमेकर लगा दिया गया |

अब उनके दिल की समस्या बहुत ही विकट रूप ले चुकी थी | अतः सन 1991 ईस्वी में मेक्सिको में न्यूमोनिया के बाद उनके हृदय की परेशानी बढ़ती ही जा रही थी अतः 13 मार्च 1997 को उन्होंने मिशन ऑफ चैरिटी के मुखिया का पद छोड़ दिया | सन 5 सितंबर 1997 में मदर टेरेसा की मौत हो गई |

मदर टेरेसा एक महान और संघर्ष से भरी महिला थी | उन्होने आजीवन संघर्ष उठाया | लोगों के संघर्ष को कम करने के लिए काम करती रही हालांकि उस पर कई आरोप लगे लेकिन वह पीछे नहीं हटी और संघर्ष करती रही | जब एक बार किसी का नाम उद्ध जाता है तो आरोप उस पर जरूर लगते हैं |

मदर टेरेसा एक ऐसी महिला थी जिसका भारत तथा दुनिया समाज कभी भी कर्ज नहीं उतार पाएगी | जब भी आप कभी इस महिला की फोटो देखें तो अपने मन में आदर कि भावना जरूर रखें क्योंकि इन्होने मानव समाज के लिए अपना पूरा जीवन त्याग दिया |

यदि आप ऐसे ऐक और महात्मा की जीवन गाथा जानना चाहते है तो आप यहा देखे nelson mandela biography in hindi

FAQ कुछ प्रमुख प्रश्न

मदर टेरेसा का जन्म कब हुआ था ?

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 ईस्वी को हुआ था

मदर टेरेसा का पूरा नाम क्या था ?

मदर टेरेसा का पूरा नाम अगनेस गोंझा बोयाजिजू था |

मदर टेरेसा की मृत्यु कब हुई ?

मदर टेरेसा की मृत्यु 5 सितंबर 1997 में हुई

मदर टेरेसा अपने किस काम के लिए भारत तथा दुनिया में प्रसिद्ध थी?

मदर टेरेसा भारत व दुनिया में अपने सेवा भावना और गरीबों की मदद करने की वजह से प्रसिद्ध हुई

मदर टेरेसा के माता-पिता का क्या नाम था ?

मदर टेरेसा के पिता का नाम निकोला बोयाजू तथा माता का नाम द्राना बोयाजू था |

मदर टेरेसा को पद्मश्री का सम्मान कब मिला?

यह पुरस्कार राष्ट्रीयता अंतर्राष्ट्रीय श्रेणी के थे 1962 ईस्वी में मदर टेरेसा को भारत का सर्वोत्तम पुरस्कार पद्मश्री से नवाजा गया

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